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Shoonya se shikhar ki or

 कुछ परिस्थितियाँ,  कुछ हादसे,  कुछ गलतियाँ,  कुछ नादानियाँ और आवश्यकता से अधिक विश्वास  अचानक ही सब कुछ बदल देते हैं  जो आप हैं,   उसका एक कतरा भी आप में नहीं बचता  आप  शून्य होते हैं,    लेकिन  शून्य के स्तर तक आ जाने के बाद   यहीं से.... बस यहीं से,  एक बार फिर   शिखर की ओर जरूर देख लेना..... वाणी